Railway Work : देश की ऐसी रेलवे लाइन जिसका काम 1929 में शुरु हुआ, अब 96 साल बाद रेलवे विभाग करेगा प्रोजेक्ट पूरा

Railway Work : पंजाब के लिए बड़ी राहत की खबर है। लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़ी 40 किलोमीटर लंबी कादियान–ब्यास रेल लाइन पर रेलवे ने एक बार फिर काम शुरू करने का फैसला किया है। रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने शनिवार को अधिकारियों को इस प्रोजेक्ट को तुरंत ‘डीफ्रीज’ करने और निर्माण की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने के निर्देश दिए।
क्या है ‘फ्रीज’ और ‘डीफ्रीज’ स्टेटस?
रेलवे के तकनीकी शब्दों में, किसी प्रोजेक्ट को ‘फ्रीज’ तब किया जाता है, जब जमीन अधिग्रहण, राजनीतिक अड़चनों, अलाइनमेंट विवाद या अन्य कारणों से उस पर आगे काम करना संभव न हो।
वहीं, ‘डीफ्रीज’ का मतलब है कि सभी बाधाओं को दूर करके प्रोजेक्ट को फिर से सक्रिय कर देना।
रेल राज्य मंत्री का बयान
एक प्रेस बयान में बिट्टू ने कहा कि केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पंजाब में रेलवे प्रोजेक्ट्स के लिए फंड की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा:
“मैं नए प्रोजेक्ट्स शुरू करने, पेंडिंग कार्यों को पूरा करने और अचानक रुके प्रोजेक्ट्स को दोबारा चालू करने के लिए लगातार काम कर रहा हूं। मोहाली–राजपुरा, फिरोजपुर–पट्टी और अब कादियान–ब्यास… मुझे पता था कि यह लाइन कितनी जरूरी है। इसलिए मैंने अधिकारियों को सभी रुकावटें तुरंत दूर कर कंस्ट्रक्शन शुरू करने को कहा है।”
उन्होंने यह भी कहा कि यह रेल लाइन क्षेत्र के ‘स्टील टाउन’ बटाला की इंडस्ट्रियल यूनिट्स को बड़ी राहत देगी और वहां की गिरती औद्योगिक गतिविधि को दोबारा गति मिलेगी।
1929 में मिली थी पहली मंजूरी
नॉर्दर्न रेलवे के CAO (कंस्ट्रक्शन) की ओर से जारी लेटर में बताया गया है कि रेलवे बोर्ड ने इस प्रोजेक्ट को फिर से सक्रिय करने और डिटेल्ड एस्टीमेट दोबारा जमा करने को कहा है, ताकि निर्माण कार्य शुरू हो सके।
इस लाइन को ब्रिटिश सरकार ने 1929 में मंजूरी दी थी। नॉर्थ-वेस्टर्न रेलवे ने 1932 तक करीब एक-तिहाई काम पूरा भी कर लिया था, लेकिन प्रोजेक्ट अचानक बंद हो गया।
2010 में भी हुई थी कोशिश
कादियान–ब्यास लाइन को रेलवे ने ‘सोशलली डिज़ायरेबल प्रोजेक्ट’ की श्रेणी में रखा था और इसे 2010 के रेलवे बजट में शामिल किया गया था।
लेकिन उस समय प्लानिंग कमीशन की वित्तीय आपत्तियों के कारण यह फिर रुक गया।
‘सोशलली डिज़ायरेबल प्रोजेक्ट्स’ वे होते हैं जहां रेलवे आर्थिक लाभ से ज्यादा सस्ती और सुलभ यात्रा सुविधा उपलब्ध कराने पर ध्यान देता है।
अब क्या होगा?
रेल मंत्रालय की मंजूरी के बाद:
जमीन और अलाइनमेंट की अड़चनें हटाई जाएँगी
डिटेल्ड एस्टीमेट दोबारा तैयार होगा
फिर 40 किमी रेल लाइन का निर्माण शुरू किया जाएगा
क्षेत्र की इंडस्ट्री और आम लोगों को सीधा लाभ मिलेगा
पंजाब के लिए यह प्रोजेक्ट ऐतिहासिक भी है और विकास की दिशा में बड़ा कदम भी।